उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल केदारनाथ धाम की यात्रा की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। 8 अप्रैल 2025 से केदारनाथ के लिए हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की जा रही है। इस बार यात्रियों को हेली सेवा का लाभ उठाने के लिए थोड़ा अधिक भुगतान करना होगा क्योंकि किराए में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) ने इस बार की चारधाम यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। IRCTC की वेबसाइट पर 8 अप्रैल से बुकिंग के लिए पोर्टल लाइव कर दिया जाएगा। इसके लिए IRCTC जल्द ही बुकिंग लिंक जारी करेगा।
2 मई से खुलेगा केदारनाथ धाम के कपाट
केदारनाथ मंदिर के कपाट इस वर्ष 2 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे, और उसी दिन से हेली सेवाओं का संचालन भी शुरू हो जाएगा। हेली सेवाएं तीन प्रमुख स्थानों—गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी—से उपलब्ध रहेंगी।
हेली टिकट बुक करने के लिए यात्रा पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। UCADA द्वारा IRCTC को पहले ही पंजीकरण से जुड़े यात्रियों का डेटा सौंप दिया गया है, ताकि प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।
इन कंपनियों को मिला संचालन का जिम्मा
इस बार हेली सेवा संचालन का जिम्मा सात निजी हेली कंपनियों को सौंपा गया है। इनमें पवन हंस, हिमालयन हेली, ट्रांस भारत, ग्लोबल विक्ट्रा, थंबी एविएशन, केस्ट्रल एविएशन और एयरो एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इन कंपनियों के साथ तीन साल के अनुबंध किए गए हैं, जिससे यात्रा की नियमितता और सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
नया किराया जानें
इस बार हेली सेवा के किराए में लगभग 5% की बढ़ोतरी हुई है। यात्रियों को राउंड ट्रिप (आने-जाने) के लिए निम्नलिखित दरों का भुगतान करना होगा:
रूट किराया (राउंड ट्रिप)
सिरसी से केदारनाथ ₹6061
फाटा से केदारनाथ ₹6063
गुप्तकाशी से केदारनाथ ₹8533
यात्रियों के लिए सलाह
श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएं और IRCTC के अधिकृत पोर्टल के माध्यम से ही बुकिंग करें। किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें। यात्रा के लिए पंजीकरण कराना आवश्यक है, बिना पंजीकरण के हेली टिकट नहीं बुक की जा सकेगी।
इस साल की केदारनाथ यात्रा को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों ने कड़े इंतज़ाम किए हैं। उम्मीद है कि यह प्रयास श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सहज और यादगार बनाएगा।
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