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25 लाख की ठगी से हिली कांग्रेस: गोदियाल पर लगे आरोप, अंदरूनी कलह उजागर

25 लाख की ठगी से हिली कांग्रेस: गोदियाल पर लगे आरोप, अंदरूनी कलह उजागर

देहरादून में सामने आया 25 लाख की ठगी का मामला अब सिर्फ आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। आरोपी ने खुद को Rahul Gandhi का पीए बताकर राज्य आंदोलनकारी भावना पांडेय को अपने जाल में फंसाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ऐंठ ली।

12 अप्रैल 2026 को एक फोन कॉल से शुरू हुई इस कहानी में आरोपी ने खुद को “कनिष्क” बताते हुए दावा किया कि वह हाईकमान से जुड़ा है। उसने उत्तराखंड में सर्वे के लिए आने वाले विधायकों के ठहरने और व्यवस्थाओं का हवाला देकर भरोसा बनाया। इतना ही नहीं, उसने बातचीत के दौरान बड़े नेताओं की आवाज तक सुनवाकर खुद को असली साबित करने की कोशिश की।

अगले ही दिन पैसों की मांग शुरू हो गई। भावना पांडेय ने भरोसा करते हुए अलग-अलग बैंक खातों से लगभग 19 लाख रुपये निकाले और बाकी नकद मिलाकर कुल करीब 25 लाख रुपये आरोपी तक पहुंचा दिए। इस दौरान आरोपी और उसका सहयोगी खुद को अलग-अलग नेताओं का प्रतिनिधि बताकर रकम लेते रहे।

मामले ने उस वक्त नया मोड़ लिया जब आरोपी ने पार्टी के अंदरूनी मामलों पर बात करनी शुरू कर दी। उसने Ganesh Godiyal को हटाने जैसी बातें कही, जिससे भावना पांडेय को शक हुआ कि मामला सिर्फ व्यवस्था या सर्वे का नहीं है।

शक गहराने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी कनिष्क उर्फ गौरव कुमार को देहरादून के जाखन क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि वह पहले भी कई राज्यों में टिकट दिलाने के नाम पर ठगी कर चुका है।

इस बीच, भावना पांडेय ने खुलकर गोदियाल पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर गलत लोगों को जगह दी जा रही है। वहीं गोदियाल ने इन आरोपों को साजिश करार देते हुए कहा कि अगर पार्टी चाहे तो वह पद छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन सच सामने आना चाहिए।

गोदियाल ने यह भी दावा किया कि उन्हें भी इसी ठग का फोन आया था और उन्हें भ्रमित करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने मांग की कि सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क और “प्रायोजन” का खुलासा होना चाहिए।

यह मामला अब तीन बड़े सवाल खड़े कर रहा है—क्या यह केवल ठगी है या इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश है? आरोपी को अंदरूनी जानकारी कहां से मिली? और क्या इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका है?

देहरादून की यह घटना अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीति में भरोसे के संकट और अंदरूनी खींचतान की कहानी बनती जा रही है।

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