मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर उत्तराखंड में रेल नेटवर्क के विस्तार और लंबित परियोजनाओं को गति देने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत करने, नई रेल सेवाएं शुरू करने और प्रमुख रेलवे स्टेशनों के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्ताव रखे गए, जिन पर रेल मंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के प्रवासी रहते हैं। वहीं, बाबा नीम करौली धाम (कैंची धाम), जागेश्वर धाम और चारधाम यात्रा के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु राज्य पहुंचते हैं। इसे देखते हुए उन्होंने मुंबई और देहरादून के बीच नई वंदे भारत या सुपरफास्ट एक्सप्रेस शुरू करने का अनुरोध किया। साथ ही देहरादून-कोटा रेल सेवा को सूरत और वड़ोदरा के रास्ते मुंबई तक बढ़ाने तथा मुंबई-हरिद्वार और मुंबई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाकर नियमित अथवा सप्ताह में कम से कम तीन दिन संचालित करने की मांग भी रखी।
बैठक में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े रणनीतिक और व्यापारिक महत्व वाले बनबसा रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों के ठहराव का मुद्दा भी उठाया गया। रेल मंत्री ने इस मांग को स्वीकार करते हुए टनकपुर से संचालित त्रिवेणी एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस और दौराई एक्सप्रेस का बनबसा स्टेशन पर अल्पकालिक ठहराव सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि को राज्य सरकार को हस्तांतरित कर वहां प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर विकसित करने पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार और रेल भूमि विकास प्राधिकरण मिलकर इस परियोजना का मास्टर प्लान तैयार करेंगे। इसके अलावा रायवाला से देहरादून तक हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर सहमति बनी। हरिद्वार, हर्रावाला, देहरादून, खटीमा, लक्सर, रुड़की, टनकपुर और बनबसा रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, सौंदर्यीकरण तथा आवश्यक स्थानों पर दोहरीकरण की दिशा में भी कार्य तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने किच्छा-सितारगंज-खटीमा नई रेल लाइन परियोजना की पूरी लागत केंद्र सरकार से वहन करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही खटीमा-मझोला पीलीभीत मार्ग पर बंद पड़े रेलवे फाटक संख्या-18सी को दोबारा खोलने की मांग भी रखी गई। रेल मंत्री ने इन दोनों प्रस्तावों पर भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।













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