भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में उज्जैन की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार से जुड़े एक ट्रस्ट को उज्जैन में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन बेहद कम कीमत पर आवंटित की गई। पार्टी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि जिस जमीन का बाजार मूल्य करीब 500 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, उसे मात्र एक रुपये के वार्षिक पट्टे पर ट्रस्ट को दिए जाने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस का कहना है कि संबंधित ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार राम शर्मा हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि उज्जैन में हाल के वर्षों में हुए भूमि सौदों और विकास परियोजनाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े भूमि खरीद मामलों की भी न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के राजनीतिक आरोप लगा रहा है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार की ओर से किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। कांग्रेस जहां न्यायिक जांच और पारदर्शिता की मांग कर रही है, वहीं भाजपा आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। मामले में किसी सक्षम न्यायिक अथवा जांच एजेंसी की ओर से अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।



